अंटार्कटिका की बर्फ में छिपा 12 लाख साल पुराना राज, जानिए

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अंटार्कटिका की बर्फ में छिपा 12 लाख साल पुराना राज, वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के जलवायु इतिहास की झलक पाई। अंटार्कटिका की यह खोज टाइम मशीन जैसी मानी जा रही है।

अंटार्कटिका की बर्फ में छिपा 12 लाख साल पुराना राज, वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के जलवायु इतिहास की झलक पाई। अंटार्कटिका की यह खोज टाइम मशीन जैसी मानी जा रही है।

बर्फ में छिपा पृथ्वी का अतीत: अंटार्कटिका से निकली 12 लाख साल पुरानी टाइम मशीन!

अंटार्कटिका की बर्फ में छिपा 12 लाख साल पुराना राज, कहां से मिली ये अद्भुत बर्फ?

धरती के छोर पर बसा, बर्फ से ढका अंटार्कटिका हमेशा से रहस्यों से भरा रहा है। अब वहां से एक ऐसा खोज हुआ है जिसने विज्ञान की दुनिया में हलचल मचा दी है। लगभग 9,186 फीट (करीब 2.8 किलोमीटर) बर्फ के नीचे से वैज्ञानिकों ने एक ऐसा “आइस कोर” (Ice Core) निकाला है, जिसे “टाइम मशीन” की उपाधि दी जा रही है। यह बर्फ 12 लाख साल पुरानी है, यानी उस समय की जब न तो सभ्यताएं थीं, न ही आज जैसा पर्यावरण।

अंटार्कटिका की बर्फ में छिपा 12 लाख साल पुराना राज, कैसे हुई यह खोज?

इस ऐतिहासिक खोज को बियॉन्ड एपिका (Beyond EPICA – Oldest Ice) नामक एक यूरोपीय प्रोजेक्ट के तहत अंजाम दिया गया। चार वर्षों की मेहनत और 12 यूरोपीय देशों की भागीदारी के बाद वैज्ञानिकों की टीम ने इस “जमी हुई किताब” को धरती से निकाला। शोधकर्ता इस आइस कोर को 1 मीटर के टुकड़ों में काटकर इसकी सूक्ष्मतम परतों का विश्लेषण कर रहे हैं।

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 बर्फ के बुलबुले में कैद है लाखों साल का वातावरण

इस बर्फ के अंदर कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और अन्य ग्रीनहाउस गैसों के बुलबुले बंद हैं, जो लाखों साल पुराने वातावरण की झलक देते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन बुलबुलों की स्टडी से यह समझा जा सकेगा कि पृथ्वी का जलवायु चक्र कैसे बदलता रहा है। इससे यह भी अनुमान लगाया जा सकेगा कि भविष्य में जलवायु परिवर्तन किस दिशा में जाएगा।

अंटार्कटिका की बर्फ में छिपा 12 लाख साल पुराना राज, टाइम मशीन कैसे बनी बर्फ?

इस आइस कोर को वैज्ञानिक “टाइम मशीन” इसलिए कह रहे हैं क्योंकि इसमें वह सब कुछ मौजूद है जो “पृथ्वी के अतीत” को जीवंत कर सकता है। इसमें सूर्य की विकिरण, ज्वालामुखीय राख, ग्लेशियरों की उम्र, और Ice Age के संकेत तक छिपे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि 10 लाख साल पहले हुए Ice Age में कैसे मानव जीवन ने खुद को ढाला — यह इस बर्फ के माध्यम से जाना जा सकेगा।

1966 से जारी प्रयासों की नई ऊंचाई

इस खोज की नींव 1966 में हुई एक जलवायु शोध परियोजना में पड़ी थी, जिसमें 8 लाख साल पुराने वातावरण का डाटा इकट्ठा किया गया था। Beyond EPICA उसी परियोजना की आधुनिक और विस्तारित कड़ी है। 200 दिनों की खुदाई, अत्याधुनिक ड्रिलिंग तकनीक और वातावरण के प्रति वैज्ञानिकों की अथक जिज्ञासा — सब मिलकर इस इतिहास को उजागर कर रहे हैं।

 यह खोज क्यों है जरूरी?

आज जब जलवायु परिवर्तन का खतरा मानव सभ्यता के अस्तित्व पर मंडरा रहा है, तब यह खोज हमें हमारी पृथ्वी के पुराने सबक सिखा सकती है। यह बर्फ की परतें बताती हैं कि धरती ने अतीत में भी कितने परिवर्तन देखे और किस तरह जीवन ने उसे झेला। यह अध्ययन भविष्य की रणनीतियों और पर्यावरणीय नीतियों के लिए एक आधार बन सकता है।

अंटार्कटिका की बर्फ अब सिर्फ बर्फ नहीं, पृथ्वी का इतिहास है। यह खोज एक चेतावनी है कि हम अपने पर्यावरण को लेकर सजग रहें, अन्यथा वह समय दूर नहीं जब यह “टाइम मशीन” हमें भविष्य के विनाश का आईना भी दिखाए।

लेख में प्रयुक्त सभी तथ्य, आंकड़े और व्याख्याएं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं और इसका उद्देश्य केवल शैक्षणिक व वैज्ञानिक जन-जागरूकता है।

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