अंता उपचुनाव 2025: त्रिकोणीय संघर्ष के बीच चुनावी प्रचार परवान पर, जानिए कैसे
Anta Byelection 2025 में सियासी बयानबाजी और ग्रामीणों की नाराजगी का माहौल
Anta Byelection 2025: सादगी बनाम सियासी बयानबाजी, अंता में बढ़ा चुनावी तापमान और जनता की नाराजगी
अंता में चढ़ा सियासी पारा, नेताओं की बयानबाजी और जनता की नाराजगी ने बढ़ाई गरमी
Anta Byelection 2025 अब पूरे उफान पर है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है और सियासी माहौल गरमाने लगा है। प्रत्याशी गांव-गांव जाकर वोटरों को रिझाने में जुटे हैं, वहीं जनता भी अपने मुद्दों और नाराजगी के साथ खुलकर सामने आ रही है।
नरेश मीणा के बयान से गुर्जर समाज में रोष
कांग्रेस से नाराज चल रहे निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। हाल ही में एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने पूर्व मंत्री अशोक चांदना को “चांदनी” कहकर संबोधित किया, जिसके बाद गुर्जर समाज में गहरा रोष फैल गया।
गुर्जर समुदाय ने इसे अपमानजनक बताया है। सोशल मीडिया पर युवाओं ने विरोध दर्ज कराया और कई स्थानों पर समाज की बैठकों में इस बयान की कड़ी निंदा हुई है। यह विवाद नरेश मीणा की छवि और चुनावी समीकरण दोनों को प्रभावित कर सकता है।
मोरपाल सुमन की सादगी बनी भाजपा की ताकत
भाजपा उम्मीदवार मोरपाल सुमन अपनी सादगी और ईमानदार छवि के कारण चर्चा में हैं। ग्रामीण इलाकों में उनकी सादगी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनती दिख रही है।
लोग उन्हें “अपना आदमी” मानते हैं और विश्वास जता रहे हैं कि जीतने पर वे जनता की समस्याओं को सीधे सरकार तक पहुंचाएंगे।
पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि सुमन का जमीनी जुड़ाव और भरोसेमंद व्यक्तित्व भाजपा के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया को लेकर मतभेद
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया को लेकर जनता में मिश्रित प्रतिक्रिया है।
एक ओर समर्थक मानते हैं कि उनके अनुभव से क्षेत्र में विकास की रफ्तार बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर कई लोग उन्हें जनता से दूर मानते हैं।
कुछ ग्रामीणों का कहना है कि भाया तक पहुंचना आसान नहीं है, जिससे आम जनता की समस्याएं सीधे उन तक नहीं पहुंच पातीं। यह दूरी चुनाव में कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकती है।
बैगना गांव के ग्रामीणों का मतदान बहिष्कार, जमीन विवाद बड़ा मुद्दा
Anta Byelection 2025 के बीच बारां जिले के बैगना (छापर) गांव के ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने 200 से अधिक परिवारों को जमीन खाली करने के नोटिस भेजे हैं, जबकि वे पिछले 40 वर्षों से वहीं रह रहे हैं।
सरकार द्वारा पहले जारी किए गए पट्टे अब निरस्त कर दिए गए हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक कलेक्टर स्वयं गांव आकर समाधान का भरोसा नहीं देंगे, वे वोट नहीं डालेंगे।
चुनाव में सादगी बनाम बयानबाजी की जंग, जनता के मुद्दे असली केंद्र में
अंता उपचुनाव में जहां एक ओर सादगी बनाम सियासी बयानबाजी की जंग चल रही है, वहीं दूसरी ओर जनता की असल चिंताएं—जमीन विवाद, योजनाओं का लाभ और संवाद की कमी—चुनाव के असली मुद्दे बनकर उभर रही हैं।
अब देखना यह है कि जनता विकास और सम्मान के बीच किसे प्राथमिकता देती है।
अंता विधानसभा की यह जंग सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों की भी परीक्षा बन गई है।
खबर यह भी पढ़े…https://rocketpostlive.com/minister-kirodi-lal-meena-milk-food-factory-raid/